कमलेश त्रिवेदी की खबर
संबंध पर योग्यता भारी या फिर व्यवस्था ही भ्रष्ट?”शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय एक बार फिर विवादों के घेरे में है। विश्वविद्यालय में हाल ही में हुई नियुक्तियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद की एक प्रभावशाली सदस्य की भतीजी को नियमों को दरकिनार करते हुए सीधे नियुक्त किया गया, जबकि दूसरी ओर, वर्षों की मेहनत और शैक्षणिक योग्यता के बल पर मेरिट लिस्ट में जगह बनाने वाले पीएचडी धारकों को नियुक्ति प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया।

प्रमुख आरोप:कार्यपरिषद की सदस्य के रिश्तेदार की सीधी नियुक्तिचयन प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभावमेरिट सूची में स्थान पाने वाले योग्य अभ्यर्थियों की उपेक्षा योग्य उम्मीदवारों का सवाल:”जब हमने योग्यता के बल पर स्थान पाया, तो हमें क्यों दरकिनार कर दिया गया? क्या अब विश्वविद्यालयों में भी संबंध ही सर्वोपरि होंगे?”

क्या कहती है व्यवस्था?इस पूरे मामले पर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस सफाई नहीं आई है। वहीं, शिक्षा जगत से जुड़े लोग और छात्र संगठन इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
जनता का सवाल:क्या यह हमारे शिक्षा तंत्र का नया चेहरा है — जहाँ प्रतिभा को नहीं, बल्कि पैरवी को वरीयता मिलती है?मांग:उच्च स्तरीय जांच समिति का गठननियुक्ति प्रक्रिया की पुनः समीक्षादोषियों पर कार्रवाई
हमारी नज़र बनी हुई है।इस तरह के मामलों में चुप्पी ही सबसे बड़ा अपराध है। अगर आप भी इस विषय पर अपनी बात रखना चाहते हैं, तो हमें लिखें या वीडियो भेजें।
