कमलेश त्रिवेदी की खबर
बस्तर के दिल में बसे ऐतिहासिक दलपत सागर पर एक बार फिर “विकास” का चौंकाने वाला टैग लग गया है। मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना के तहत अब इस जलाशय के सौंदर्यीकरण के लिए 9 करोड़ 88 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है।
लेकिन सवाल वही पुराना है – क्या यह रकम सच्चे सुधार के लिए लगेगी, या फिर से सिर्फ फेंसिंग, लाइटिंग और बोटिंग में बहा दी जाएगी?—

🔍 विकास या दिखावा?दलपत सागर पिछले दो दशकों में करोड़ों की योजनाओं का गवाह रहा है। हर सरकार इसे चमकाने की कोशिश तो करती है
, लेकिन असल में यह दलपत सागर “सोने का अंडा” बनकर रह गया है? – जिसे समय-समय पर पालिश तो किया जाता है, लेकिन पोषण नहीं दिया जाता।नतीजा?जलकुंभी से घिरा गंदा पानीउथल जलस्तरबदबू और प्रदूषणमछलियों और जलीय जीवन का संकट—📢 जनता की मांगें क्या हैं?
बस्तर की जनता अब सजावट नहीं, संवर्धन चाहती है। लोग चाहते हैं कि इस बार की राशि का उपयोग हो:
✅ दलपत सागर को जलकुंभियों से मुक्त करने में
✅ इसकी गहराई बढ़ाकर जल संरक्षण योग्य बनाने में
✅ और इसे एक साफ, निर्मल व जीवंत जलाशय में बदलने में—
✍️ बादबस्तर की अपील:हमारी सीधी मांग है —> श्रृंगार नहीं, जीवन दो दलपत सागर को!अगर इन 9.88 करोड़ से दलपत सागर का सच्चा कायाकल्प हो सका, तो यह बस्तर के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज होगा।वरना…यह भी सिर्फ एक और “विकास का बहाना” बनकरदलपत सागर को उसी अमृत मृत्यु की ओर छोड़ जाएगा।
