सम्पादक-कमलेश त्रिवेदी की खबर
बस्तर जिले में पंचायत सचिवों की अनिश्चितकालीन हड़ताल लगातार जारी है। छत्तीसगढ़ पंचायत सचिव संघ के बैनर तले सभी पंचायत सचिव अपनी एक सूत्रीय मांग – शासकीयकरण – को लेकर हड़ताल पर डटे हुए हैं। इस हड़ताल के चलते ग्राम पंचायतों का समूचा प्रशासनिक कार्य ठप हो गया है, जिससे गांवों के विकास कार्यों पर सीधा असर पड़ा है।
बस्तर जिला मुख्यालय के जनपद पंचायतों में हड़ताल का व्यापक असर देखा जा रहा है। खासकर जगदलपुर जनपद पंचायत, जो जिले की सबसे बड़ी और सबसे शिक्षित पंचायत मानी जाती है, वहां सचिवों के हड़ताल पर जाने से पंचायतों का कामकाज पूरी तरह रुक गया है। नवनिर्वाचित सरपंचों और अन्य जनप्रतिनिधियों के लिए सचिवों के बिना कोई भी विकास योजना तैयार कर पाना मुश्किल हो गया है।
30 वर्षों से सेवा में, फिर भी शासकीयकरण से वंचित
पंचायत सचिव संघ का कहना है कि वे पिछले 30 वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें शासकीय कर्मचारी का दर्जा नहीं मिला है। संघ के जिला अध्यक्ष ने कहा कि केंद्र में मोदी सरकार और राज्य में साय सरकार भरोसे की सरकार है, और इसी भरोसे के साथ वे अपनी मांगों को पूरा करने की उम्मीद कर रहे हैं।
हड़ताल तब तक जारी रहेगी, जब तक मांग पूरी नहीं होती
सचिव संघ ने साफ कर दिया है कि जब तक सरकार उनकी मांग नहीं मानती, तब तक यह अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रहेगी। हड़ताल की वजह से पंचायतों में न तो कोई योजना बन रही है और न ही कोई विकास कार्य हो पा रहा है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि सरकार सचिव संघ की इस मांग पर क्या निर्णय लेती है और कब तक यह हड़ताल खत्म होती है।
